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संदेश

यह समय नहीं है

अभी मुझे बहुत दूर तक जाना है  इसी प्रक्रिया में अनदेखे हो सकते हैं  मेरी आंखों से कुछ रंग फूलों के कुछ रंग तितलियों के पर यह समय नहीं है  मेरे मन को खुबसूरत परिवेश  मे जीने के लिए छोड़ देने का  मैंने नहीं तय किया है  अभी तक आधा रास्ता भी  उस अन्याय के खिलाफ  जहां मौजूद हैं चीखे  रेगिस्तान के रेत में दफन बच्चियों की  प्रसव के दौरान मरे हुए स्त्रियों की  हाथों से किताबों को उतारकर  चढ़ाई गई मेहंदी की मन का गणित जो बिगड़ गया हैं  अब तक और भविष्य में  संभावनाओं के नाम पर मौजूद हैं  सरकारी दस्तावेजों पर केवल  कुछ हस्ताक्षर ही  ऐसे समय में देह के गणित का मैं कहां तक सोच सकती हूं ?

युद्ध

हिंदी की एक युद्ध कविता अंग्रेजी अनुवाद सहित                ★★★★★★★★★ युध्द         सरिता सैल,प्राध्यापक,हिंदी विभाग,कर्नाटक कितने युद्धों की बनूँ मैं साक्षी  हर कदम की दूरी पर  नींव पड़ती नए युद्ध की  समेटने का क्रम नाकाफी विस्थापन का विस्तार  उजाड का फैलाव  होता जा रहा अनंत  न आप, न मैं कदाचित कभी न गुज़रेंगे युध्द की इति के उत्सव से यह फसल आयुधों की लहलहाती  पहुँचाएगी हमें  शायद  सृष्टि के पतझड़ तक कैसा यह विनाश का यह खेल ..          ######### इसका अंग्रेजी में अनुवाद `~~~~~~~~~~~ War ●● How many wars should I be witness of At the distance of every step There is laid foundation of new war The process of winding up is insufficient Expansion of displacement  Extension of demolition Going on being infinite Neither you,nor I wil Probably ever pass through The festivity of the end of war This crop being full of green leaves Of dreaded weapons Will perhaps ma...

प्रिय

प्रिय तुम कभी नहीं बन सके एक अच्छे प्रेमी पर एक बेहतरीन मार्गदर्शक जरूर बने तुम्हारी जटिल से जटिल राजनीति और अर्थशास्त्र का ज्ञान देख मैं हमेशा अचंभित रही पर मेरे ह्रदय में बसा सबसे सरल प्यार तुम कभी समझ नहीं सके मजदूर के उदासी का रंग   अपनी क़लम में भरकर तुमने क्रांति लिखी पर मेरी आंखो में तैरता विरह का रंग तुम कभी पढ़ नहीं सके प्रिय

संभावनाएं बनी रहे

अपने इर्द-गिर्द मौजूद रखो  हमेशा कुछ खिड़कियां  ताकि हवा रोशनी और पानी  बना रहे जीवन में  कुछ दरवाजे भी खुले छोड़ दो  किसी पता कब कौन सा रास्ता  मंजिल का आकर  तुम्हारे कदमों से टकराए  कुछ संभावनाओं की नमी  भी हाथों की लकीरों में  पनपती रहने दो  ताकि असंभव के गर्त में  समाऐ कहानियों को  पंख लगे और निकल आए  कुछ नई संभावनाएं  निराशा की टोकरी में रख छोड़े  कुछ कड़वे फलों को  थोड़ा अनुभव और समय की  आंच में पकने दो  किसी पता उम्मीदों के फल  पुन्हा जीवन की टोकरी  से निकल आए संभावनाओं की खेती बची रहे जीवन में ताकि बची रहे जीवन जीने की जिजिविषा

जिम्मेदारी

सुबह अक्सर जल्दी जगा देती है और पैरों को जिम्मेदारी से लेप देती है तब अनगिनत तलवें आधी  निदं से उठकर पृथ्वी के सबसे जटिल रास्ते के सफर पर निकल पड़ते हैं और ये सब लोग एक सिक्के के लिए पाषाण  आधी रोटी के लिए पूरा समंदर और एक छत के लिए सारे आसमान पर  अपने तलवे की चमड़ी बेच आते हैं

प्रतिदिन

प्रतिदिन तुम आते हो अपने हाथों की मुट्ठी बाँधे कानों में धीरे से अगिनित शब्द दोहराते हो लोचन प्रणयसूत्र में देते हो बाँध भर देते हो गालों में स्मित हास्य बो देते हो उर में  प्रेम बीज तुम आते हो प्रतिदिन अब तो नियम सा हो गया है तुम्हारा आना जैसे आता है सूरज , चाँद जीवन में दे जाते हो शब्दों के कण और तुम चाहते हो कण कण मिलाकर मै ऋचाएं रचूं आलोकित करु जीवन पथ गढू नई सृष्टि विचरुं तुम्हारे साथ अपने होने का आभास करुं न छुकर भी सब कुछ पाना न होकर भी मुझको भर देना मुट्ठी खोलकर अपने हाथों को मेरे हाथों में देना चलो मेरे संग उस निशब्द दुनियाँ में मेरे भावों को तुम शब्दों में पिरोना मेरे साथी तुम प्रतिदिन आना ।

विश्व किताब दिवस पर

याद आते हैं वे अनगिनत बच्चे  जो पगडंडी से होकर गुजरते थे पाठशाला के लिए एक हाथ से किताबें पकड़ते  दूसरे हाथ से कभी  धान की बालियों को छूते  तो कभी अमिया पर  पत्थर फेंकते  कभी कीचड़ से सने पाव लेकर  तो कभी तपते पाषाण पर से  चलकर पहुंचते थे पाठशाला में आज विश्व किताब दिवस पर  याद आ रहे हैं वो  अनगिनत बच्चों की कतारें  जो कभी भविष्य के  सपनों को साकार करने निकले थे  पगडंडी के रास्ते  बारिशों में अपने बुशर्ट के भीतर बचाकर किताबों को  आज वे पहुंचे होंगे सब कामयाबी की राह पर