चार बहनें ब्याही गई चार दिशाओं में मिलने के लिए आना चाहती थी मायके की छत के नीचे ताकि बांट सके अपने संताप को और सुख के संदूक को पर आ न सकी कभी इकट्ठी हर बार चूकती रही तारीखें मिलने की त्योहारों में भी बंधे रहे उनके हाथ ससुराल की खुटीं से जब वे उत्तरदायित्वों से बरी कर दी गई तब तक मायके के चूल्हे की आग शमशान की लपटों में तबदील हो गई थी अब चार बहनों को नहीं बांटने होते हैं कोई सुख -दुख सुदूर से स्मरण करती है एक दूसरे की भूली बिसरी स्मृतियों को सारे पुल टूटकर धाराशाही हो गए अब तो चार दिशाओं की दूरी मानो चार देशों में तब्दील हो गई है ।
अच्छी औरतें छली गई और जिन औरतों ने विरोध किया बदला लिया वे औरतें गाली की तरह इस्तेमाल की गई इसलिए औरतों को थोड़ा कम अच्छा होना चाहिए ताकि विरोध का थोड़ा रसायन घो लकर इस दुनिया को पिला सके समय-समय पर