१)
अनगिनत वृक्ष
दुनिया भर की अलमारियों में
बैठे हैं मौन
और दीमकें जता रही हैं
उन पर अपना हक।
२)
संमदर में रोती हुई मछलीयां
सीप में रख देती हैं
अपने आंसूओं को
जो मोती बन चमकते हैं
धरती के गालों पर
३)
हर पार्वती के हिस्से
नहीं होते शिव
फिर भी वो अर्द्धनारीश्वर के रूप में
विचरती रहती है इस धरा पर !
४)
मैं तुम्हारे आंगन कि कृष्ण तुलसी बनकर
तुम्हारे ललाट पर स्थित
समस्त कठिन रेखाएं खींच कर
भस्म कर अपने देह के अंदर धर लूंगी
५)
हम दोनों के प्रेम में स्थित अधूरापन
तुम्हारे लौटने की परिभाषा है