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उसे हर कोई नकार रहा था



इसलिए नहीं कि वह बेकार था 

इसलिए कि वह  सबके राज जानता था 

सबकी कलंक कथाओं का 

वह एकमात्र गवाह था 


किसी के भी मुखोटे से

वह वक्त बेवक्त टकरा सकता था 


इसीलिए वह नकारा गया 

सभाओं से 

मंचों से 

उत्सवों से 


पर रुको थोड़ा 

वह व्यक्ति अपनी झोली में कुछ बुन रहा है

शायद लोहे के धागे से

बिखरे हुए सच को सजाने की 

कवायद कर रहा है


उसे देखो

वह समय का सबसे ज़िंदा आदमी है।

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