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बौना नजर आता है इन्सान

बौंना नज़र आता हैं
समाज का बांशिदा
जिम्मेदारी को रख़
नेताओं के कधें
केवल शब्दों का
छोड़ देता है बाण
लो  *प्रतिज्ञा* आज
उठाओं जिम्मेदारी का
कफ़न जो गिरा
विकास पर
मुरदों का चादर बन
धरा के आत्मा से
उर्जा़ का निकालों रस
उड़ेल दो आसमान पे
धमा दो बाशिदे के
पिठ पर एक पंख
भेदकर अंधकार को
तबदिल हो उजाले में


टिप्पणियाँ

  1. आम जनता को समझनी होगी ज़िम्मेदारी तभी देश राष्ट्र टिक पाते हैं ... उजाला ख़ुद लाना होगा ...

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  2. मुरदों का चादर बन
    धरा के आत्मा से
    उर्जा़ का निकालों रस
    उड़ेल दो आसमान पे
    धमा दो बाशिदे के
    पिठ पर एक पंख
    भेदकर अंधकार को
    तबदिल हो उजाले में

    वाह बेहतरीन रचना

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दु:ख

काली रात की चादर ओढ़े  आसमान के मध्य  धवल चंद्रमा  कुछ ऐसा ही आभास होता है  जैसे दु:ख के घेरे में फंसा  सुख का एक लम्हां  दुख़ क्यों नहीं चला जाता है  किसी निर्जन बियाबांन में  सन्यासी की तरह  दु:ख ठीक वैसे ही है जैसे  भरी दोपहर में पाठशाला में जाते समय  बिना चप्पल के तलवों में तपती रेत से चटकारें देता   कभी कभी सुख के पैरों में  अविश्वास के कण  लगे देख स्वयं मैं आगे बड़कर  दु:ख को गले लगाती हूं  और तय करती हूं एक  निर्जन बियाबान का सफ़र

उसे हर कोई नकार रहा था

इसलिए नहीं कि वह बेकार था  इसलिए कि वह  सबके राज जानता था  सबकी कलंक कथाओं का  वह एकमात्र गवाह था  किसी के भी मुखोटे से वह वक्त बेवक्त टकरा सकता था  इसीलिए वह नकारा गया  सभाओं से  मंचों से  उत्सवों से  पर रुको थोड़ा  वह व्यक्ति अपनी झोली में कुछ बुन रहा है शायद लोहे के धागे से बिखरे हुए सच को सजाने की  कवायद कर रहा है उसे देखो वह समय का सबसे ज़िंदा आदमी है।

जब वह औरत मरी थी

जब वह औरत मरी तो रोने वाले ना के बराबर थे  जो थे वे बहुत दूर थे  खामोशी से श्मशान पर  आग जली और  रात की नीरवता में  अंधियारे से बतयाती बुझ गई  कमरे में झांकने से मिल गई थी  कुछ सुखी कलियां  जो फूल होने से बचाई गई थी  जैसे बसंत को रोक रही थी वो  कुछ डायरियों के पन्नों पर  नदी सूखी गई थी  तो कहीं पर यातनाओं का वह पहाड़ था जहां उसके समस्त जीवन के पीडा़वों के वो पत्थर थे जिसे ढोते ढोते उसकी पीठ रक्त उकेर गई थी कुछ पुराने खत जिस पर  नमक जम गया था  डाकिया अब राह भूल गया था मरने के बाद उस औरत ने  बहुत कुछ पीछे छोड़ा था  पर उसे देखने के लिए  जिन नजरों की  आज जरूरत थी  उसी ने नजरें फेर ली थी  इसीलिए तो उस औरत ने  आंखें समय के पहले ही मुद ली थी ।