नजरअंदाज कर उन तमाम अपशब्दों को
जो आपके अच्छाई के बदले में
आपके हिस्से में आती हैं
लोक यहां अपनी सहूलियत के
हिसाब से आपके बारे में
अपना मत बदलते हैं
माना आसान नहीं होता
उस जगह से अपमान का घूंट पीकर
खामोशी से लौटना
जिस जगह की खुशहाली के लिए
मन्नतो की चिट्टियां ईश्वर के चरणों पर
अनगिनत बार आपने अर्पण की हो
अपने भीतर एक रक्त रंजित
घाव समेटे रखना
थोड़ी सी हवा लगने पर
उतर सकते है अपनों के ही
चेहरे पर से मुखोटे
इसीलिए तो उसने जख्मों पर
ओढ़ रखी है लोहे की चद्दरें
यातनाएं देने वाले शहर का पता
अनजान बीहड़ में छोड़ आई है वो
जिसने उसकी संवेदनाओं का भोग किया
उसी ने आज उसे चौराहे पर खड़ा करके
असंवेदनशीलता का गहरा घाव दिया
दुनिया की उंगलियों को उसकी ओर मोड़ दिया
हे प्रियवर अपनी सहूलियत के लिए उसे
बता देना और कितने घावों का हिसाब बाकी है
ताकि वो इस संसार से विदा होने के पूर्व
तृप्त कर सकें तुम्हारी हर इच्छाओं को