सबके पास धर्म के नाम पर
हाथों में उस बनिये का तराजू हैं
जो अपने अनुसार तौलता है
धर्म के असली दस्तावेज तो
उसी दिन अपनी जगह से
खिसक गए थे जिस दिन
स्वार्थ को अपना धर्म
बेईमानी को अपना कर्म
चालाकी को अपना कौशल समझकर
इंसानियत के खाते में दर्ज किया था