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युद्ध

युद्ध के ऐलान पर 

किया जा रहा था 

शहरों को खाली 

लादा जा रहा था बारूद 


तब एक औरत 

दाल चावल और आटे को 

नमक के बिना* बोरियों में बाँध रही थी 

उसे मालूम था 

आने वाले दिनों में

 बहता हुआ आएगा नमक 

और गिर जाएगा 

खाली तश्तरी में 


 वह नहीं भूली

अपने बेटे के पीठ पर 

सभ्यता की राह दिखाने वाली

बक्से को लादना 

पर उसने इतिहास की 

किताब निकाल रख दी

अपने घर के खिड़की पर 

एक बोतल पानी के साथ

क्योंकि,

यह वक्त पानी के सूख जाने का है..!



टिप्पणियाँ

  1. न उतनी नहीं
    धन्यवाद मित्र

    जवाब देंहटाएं
  2. युद्ध पर लिखी भावपूर्ण और सच को उजागर करती रचना

    जवाब देंहटाएं
  3. हृदय को गहरे तक झकझोडती अभिव्यक्ति,कम शब्दों में गंभीर घाव।
    अप्रतिम सृजन।

    जवाब देंहटाएं

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