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राजनीति

१)

स्वार्थ की राजनीति को
पूरा करने के लिए
इन सब नेताओं ने
हमसे वसूली हैं 
एक अंगूठे की कीमत 
और कर दिया है 
इतिहास,वर्तमान और भविष्य 
अपाहिज 

२)

राजनीति में विरोधी 
वह मदारी हैं 
जो कांच के दरवाजे 
के अंदर बैठकर 
उस पार का दृश्य देखता है 
और जब जनता 
सूखे पत्तों की तरह 
धूप में कड़क(तिलमिला) हो जाती हैं 
तब उनकी हड्डियों को 
चुल्हे में सरकाकर 
उस पर बिना बर्तन रखे 
तमाशा देखता है

३)

हे मनुज तूने
सभ्यता की देह पर
असभ्यता का 
तांडव रचा दिया है 
तेरी कालाबाजारी से
तेरी भ्रष्ट राजनीति से
धू, धू करके जलती
चिताओं ने आसमान तक की 
आंखें भींगो दी 
इन लाशों से जन्मी कालिख़
तेरे आने वाली
अनगिनत पीढियों के
मस्तिष्क पर स्थापित
गहरा कलंक है
और मेरा अपाहिज
मौन है

४)
जनता ने नेताओं को 
रेशम का कीड़ा समझा है 
जो सिहासन के 
हरियाली पर बैठकर 
उनके लिए उम्मीदों का 
वस्त्र बुनेगा 
पर राजनीति में 
जनता तो केवल 
वह मखमली धागा है 
जिसे पकड़ कर
सत्ता के सिंहासन तक
पहुंचा जाता है


टिप्पणियाँ

  1. बहुत ही गहनतम रचनाएं...। इससे बेहतर कटाक्ष मौजूदा दौर में राजनीति पर मैंने नहीं देखे...। बहुत अच्छी तरह से अपना असंख्या लोगों की बात कह दी....वाह बहुत खूब।

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  2. बहुत ख़ूब ... प्रभावी रचनाएँ ...

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  3. राजनीति पर लिखी प्रभावी कविताएँ

    जवाब देंहटाएं

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जिस दिन समाज का  छोटा तबका  बंदूक की गोलियों से  और तलवार की धार से  डरना बंद कर देगा । उस दिन समझ लेना  बारूद के कारखानों में  धान उग आएगा बलिया हवा संग चैत  गायेगी । बच्चों के हाथों से  आसमान में उछली गेंद पर  लड़ाकू विमान की  ध्वनियां नहीं टकराऐगी । जिस दिन समाज का  छोटा तबका बंदूक  और तलवार की भाषा को  अघोषित करार देगा । उस दिन एक नई भाषा  का जन्म होगा  जिसकी वर्णमाला से  शांति और अहिंसा के नारों का निर्माण होगा ।

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जब वह औरत मरी तो रोने वाले ना के बराबर थे  जो थे वे बहुत दूर थे  खामोशी से श्मशान पर  आग जली और  रात की नीरवता में  अंधियारे से बतयाती बुझ गई  कमरे में झांकने से मिल गई थी  कुछ सुखी कलियां  जो फूल होने से बचाई गई थी  जैसे बसंत को रोक रही थी वो  कुछ डायरियों के पन्नों पर  नदी सूखी गई थी  तो कहीं पर यातनाओं का वह पहाड़ था जहां उसके समस्त जीवन के पीडा़वों के वो पत्थर थे जिसे ढोते ढोते उसकी पीठ रक्त उकेर गई थी कुछ पुराने खत जिस पर  नमक जम गया था  डाकिया अब राह भूल गया था मरने के बाद उस औरत ने  बहुत कुछ पीछे छोड़ा था  पर उसे देखने के लिए  जिन नजरों की  आज जरूरत थी  उसी ने नजरें फेर ली थी  इसीलिए तो उस औरत ने  आंखें समय के पहले ही मुद ली थी ।