१
आंखों के किनारे पर
एक बून्द आंसू छिपा रहता है
मेरे ह्रदय के साथ हर क्षण
मौन संवाद करता रहता है
२
तुम्हारी यादों से जब
मैं मौन संवाद साधती हूँ
तब आँखों से बहते आँसू
शब्द - शब्द बन विह्वल हो उठते हैं
३
तुम्हारा होकर भी
तुम्हारा ना होकर रहना
तकलीफ देता है
४
डायरी के अंतिम पन्ने पर
लिखी एक कविता हो तुम
बया न कर पाऊंगा मैं कभी
वो दर्द हो तुम।
६
दो आंखें
रोज बैठती है
खिड़की पर
दूर तलक
जाती है
खाली हाथ
लौट आती है
६
लफ़्ज़ों को डुबो दिया है
हमने आंसुओं के सैलाब में
अब एहसास का दरिया जब भी उमड़ता है
रख देती हुं लफ़्ज़ों को आसमान पर
७
जहाँ पर तुमने
अपने वचनों को तोड़ा था
वहीँ पर मेरी मुस्कुराहट ने दम तोड़ा था