1.
धुएँ की एक लकीर थी
शायद मैं तुम्हारे लिये
जो धीरे-धीरे
हवा में कही गुम हो गयी
2.
वो झूठ के सहारे आया था
वो झूठ के सहारे चला गया
यही एक सच था
3.
संवाद से
समाधि तक
का सफर
खत्म हो गया
4.
प्रेम दुनिया में
धीरे धीरे
बाजार की शक्ल
ले रहा है
प्रेम भी
कुछ इसी तरह
किया जा रहा है
लोग हर चीज को
छुकर दाम पूछते है
मन भरने पर
छोड़कर चले जाते हैं