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श्रधांजलि



एक दिन हम गुम हो जायेंगे धरा से
आप के कॉन्टैक्ट लिस्ट 
में पडा़ नबर हमारा
बिना मोल के सिक्के जैसा
पडा़ रहेगा

गुलाबी साड़ी में तुम्हारे
आंगन में चढ़े मधुमालती के
बेल पर प्रवासी चिड़िया की तरह
कभी न लौटने के लिए
आकर आंखें मुदे 
बेठ जावुगी और एक दिन
जब पक जायेंगे तुम्हारे बाल
धिरे धिरे चिड़िया भी
त्याग देगी अपने पंख

एक दिन इमोजी वाला गुस्सा
हमेशा टपक  पड़ता था
आप के इनबॉक्स में
वो धिरे धिरे निस्तेज
पडा़ फूल की तरह मुरझा जायेगा
और मेरे साथ मिट्टी हो जायेगा

नारयल के पेड़ों ने भी
सुनी है मेरी सिसकियां
रात रात भर जगा है वो मेरे साथ
मेरे मरने के उपरांत
तुम एक दिन जाना उसके पास
और सुनना मैंने जीया विरह

मेरे प्रदेश के समंदर में
तैरती मछलियों के पुतलियों ने
धरा है मेरी आंखों का काजल
और काली नदी ने
पिये है मेरे आंसू
तुम आना और बैठना
नदी के पास और
उतार लेना अपने मन में
इस कावेरी कि विफल प्रेम गाथा
और भरना अपनी कलम में स्नाह्यी
और देना मुझे उपन्यास की
एक श्रध्दांजलि





टिप्पणियाँ

  1. आपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" बुधवार 26जून अप्रैल 2024को साझा की गयी है....... पाँच लिंकों का आनन्द पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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