1.
तुम फुर्सत में मुझे याद करते थे
और तुम्हें याद करते-करते
मुझे और किसी काम के लिए
फुर्सत ही नहीं मिलती थी
अजीब है ना यह प्यार भी
2.
हमने तो साथ चलने के लिए
साथ मांगा था तुमने तो
साथ छोड़ने के लिए साथ मांगा
फिर भी खामोशी से
तुम्हारा साथ देकर हम निकल गए
3.
सिज रही है एक कविता
जहां पर आप रहते हो
आपके ह्रदय के ताप की
अग्नि में पकते हैं मेरे शब्द
देह का नमक मिलाकर
बनती हैं एक कविता