हमेशा एक दरवाजा
खुला रखना उन बेटियों के लिए
जो कुए की तरफ मुड़ने के पूर्व
मुड़ जाए उस घर की तरफ
जहां दीवारों ने सहेज रखी हैं
उनकी पहली किलकारी ।
चखने दो उन्हें पुन्हा
उस नारियल का पानी
जिसकी जड़ को उन्होंने सिंचा था
गुनगुनाते कोई फिल्मी गीत
जीने की आस खत्म हुई उन बेटियों को
पुनः स्थापित करने दो संवाद
मां के आंचल के साथ
अलमारी में रखे उनकी
पुरानी चीजों के साथ
जिस पर आज भी मौजूद हैं
नन्ही उंगलियों से लेकर
जवां हुए उनके हाथों का स्पर्श
इतनी भर गुजारिश है मेरी
पितृसत्ता के पहरेदारों
बेटियों को वंचित ना करो
उनकी गर्भनाल की जमी से