तुमने समस्याओं को फाइलों में
उलझाकर रखा था
चुनावी मौसमों में
मंचन से रुझाया था
हाथों के इशारे कर-करके
जनता और नेताओं के
बिच की दूरीयों को
बताया था
तुम्हारे बाप दादाओं ने
अगर दलों में पसीना बहाया था
तो क्या हुआ हमारे भी
पूर्वजों ने
आजादी की लड़ाई में
खून बहाया था
बस आज फर्क केवल इतना सा है
तुम्हारे पूर्वजों के नाम से इतिहास बना है और
हमारे पूर्वजों के नाम से मिट्टी का रंग गहरा है ।