बेवफ़ाई का समंदर दिसंबर 16, 2021 रात बिरात एक कसक सी उठ जाती हैशब्दों को आंसुओं से भिगो कर जलाती हू एक दिया उसकी राख से दर्द का काजलनैनों मे सजाती हूँ तुम्हारे बेवफाई के संमदर मेतैरने लगता हैनैनों का काजल शेयर करें लिंक पाएं Facebook X Pinterest ईमेल दूसरे ऐप शेयर करें लिंक पाएं Facebook X Pinterest ईमेल दूसरे ऐप टिप्पणियाँ
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