आत्महत्याऐ सितंबर 04, 2021 आत्महत्या कुछ आत्महत्याओं में सच्चाई के पर्चें नहीं खोले जाते हैं हत्यारे के नाम पर हमेशा कफन पड़ा रहता है क्योंकि कुछ आत्महत्या देह कि नहीं आत्मा के होती हैंह शेयर करें लिंक पाएं Facebook X Pinterest ईमेल दूसरे ऐप शेयर करें लिंक पाएं Facebook X Pinterest ईमेल दूसरे ऐप टिप्पणियाँ अनीता सैनी 4 सितंबर 2021 को 10:25 am बजेसही कहा।मार्मिक सृजन।सादर जवाब देंहटाएंउत्तरजवाब देंअनीता सैनी 4 सितंबर 2021 को 7:28 pm बजेजी नमस्ते ,आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा रविवार(०५ -०९-२०२१) को 'अध्यापक की बात'(चर्चा अंक- ४१७८) पर भी होगी।आप भी सादर आमंत्रित है। सादर जवाब देंहटाएंउत्तरजवाब देंAmrita Tanmay5 सितंबर 2021 को 6:58 am बजेकटु सत्य ।जवाब देंहटाएंउत्तरजवाब देंटिप्पणी जोड़ेंज़्यादा लोड करें... एक टिप्पणी भेजें
सही कहा।
जवाब देंहटाएंमार्मिक सृजन।
सादर
जी नमस्ते ,
जवाब देंहटाएंआपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा रविवार(०५ -०९-२०२१) को
'अध्यापक की बात'(चर्चा अंक- ४१७८) पर भी होगी।
आप भी सादर आमंत्रित है।
सादर
कटु सत्य ।
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