जब से ढूँढ़े जाने लगे हल
बारूद की बोरियों में
तब से किसानों के हल को
चाटना शुरू कर दिया दीमकों ने
जब से बारूद के कारखाने के
मालिकों के जूते साफ करने
गाँवों से किसान आने लगे
तब से बोरियों की आँतें सिकुड़ने लगीं
जब से आने लगीं
किसानों की रेज़गारियाँ
बारूदी कारखानों से
तब से गायब है मिट्टी की गंध
धरतीपुत्रों की मुट्ठियों से
जब से बादलों ने सुनी है
लुप्त होती बैलों की घंटियाँ
और बारूदी गोलियों की कथा
तब से बूँदों ने सुनायी है
खेतों से बालियों के बिछड़ने की व्यथा
जब से बारूदी रँग
वसुंधरा के सीने पर जम गया है
तब से लुप्त होता जा रहा है
मेरे पूर्वजों की सभ्यता का रँग