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आवो कुछ क्षण के लिए

आओ तुम कुछ क्षण के लिए 
वहीं जायेगे कुछ पल के लिए
मिलीं थीं जहाँ नजरों से नजरें
एहसासों का हुआ था प्रथम मिलन
हुआ था जहाँ से
भविष्य के सपनों का संचरण
ज़रा सा भी व्यथित ना होना तुम
लौट जाना फिर से अपनी दुनियां में 
साथी आज अन्तर हो चुका है  
भूत और वर्तमान के बीच
लोग ढूंढेगे उन पत्तो में 
तुम्हारे दबे हुए कदमों को
खोजेंगे समीर के बीच घुली हुई
आवाजों को फिजाओं के
उन फुलों में बसी हुई हमारी महक को
और सावन की फुहारों मे  
हमारा स्पर्श ढूंढेंगे
आओ कुछ क्षण के लिए 
तुम वहीं जायेगे 
जहाँ से बिछड़े थे हम तुमसे
हमेशा हमेशा के लिए....

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