युद्ध
युद्धों की रणनीतियाँ
तय की जाती रही हैं
हमेशा से
ऊँचे आसनों पे बैठकर
युद्ध के नाम से
जितनी डरती है एक माँ
उतना नहीं डरता एक राजा
मां भेजती है
रणभूमि में
अपने नसों में बहता हुआ लहू
और राजा केवल भेजता है
औजारों से लैस एक सैनिक
किसी सैनिक की शहादत पर
क्रंदन की ध्वनि से
नहीं विचलित होता है राजा
उसे तो सिंहासन के
डावांडोल की ध्वनि
भूगर्भ में उठते
भूकंप सी लगती है
राजा के लिए मृत सैनिक
मात्र गिनती के अंक बनकर रह जाते
और अख़बारों के पन्नों के लिए
महज एक ख़बर
ठीक उसी जगह छपी होती है
जहां पर पिछले दिनों
छपी थी खबर
मंत्रियों के सुरक्षा इंतजामों की ।