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संदेश

ईश्वर

ईश्वर का  प्रतीक है वर्षा, पानी  उसका प्रतिनिधि हैं वह  वह धरती को करता है  हरा , भरता है जीवन  ३१/०८/२०१७

स्त्रियाँ

स्त्रियाँ चखी  जाती हैं  किसी व्यंजन की तरह  उन्हें उछाला जाता है  हवा में किसी सिक्के की तरह  उन्हें परखा जाता है  किसी वस्तु की तरह  उन्हें आजमाया जाता है  किसी जडीबुटी की तरह उन्हें बसाया जाता है  किसी शहर की तरह  और खाली हाथ लौटया जाता है  किसी भिक्षूणी की तरह  पर आने वाली संभावनाओं की  बारिश में उगेंगे कुछ ऐसी स्रियाँ   जो हवा में उछाले सिक्के को  अपने हथेलियों पर धरकर मन के अनुसार उस सिक्के का  हिसाब तय करेगी 

प्रेम

प्रेम प्रेम वो नहीं जो तुमने किया अपनी सुविधा के अनुसार बल्कि प्रेम वो था  जो तुम्हारे पास समय की  कमी के कारण तुम्हारे आफिस की फाइलों में बंद रहा  और मैं दिन महीने साल दर साल प्रतीक्षारत रही अक्सर शाम चाय चढ़ाते समय जब मैं तुम्हे पूछा करती थी  आज कितनी बार चाय हो गई तुम झूठ कहते थे हर बार पर पूरे दिन की दिनचर्या में जितनी बार तुम्हें याद करती प्रत्येक बार एक बूंद चाय की  तुम्हारे होंठ से मेरे होंठों तक का  सफर तय करती अलमारी में है आज भी खाली लाल रंग की साड़ी की जगह  जितने फिक्र से टटोलती थी  तुम्हारा बटुवा  उतनी ही बेफिक्री से प्रत्येक बार मांगती थी तुमसे हर त्यौहार में घुले रंग की भाँति पहनी साड़ी सी तुम्हारे प्रिय रंगों को बदलता देख  मैं हर बार मुस्कुराती थी  मन ही मन प्रेम वह था जो मैंने  अभावों में भी है जिया तुम्हारे छोड़ कर चले जाने के बाद भी  उपहार में तुम्हारे दिये हुए  आंसुओं को   तुम्हारी बदनामी के भय से  कभी अपनी आंखों से बहने नहीं दिया  यद्यपि हृदय से उठती हुंकार पर हर बार मेरे होठों ...

जीवन यात्रा

मेरा कहने लायक  बहुत कम था मेरे पास  कुछ सालों बाद  तुम आए तुमने सदा कहां  मुझे देख सकती हो तुम हर उस रिश्ते में जो तुम्हारे जीवन की बंजरता पर कभी नहीं उग आये कुछ सालों तक मेरी यात्रा में  बहुत कुछ शामिल रहा  मेरा कहने लायक  एक दिन तुम बीच यात्रा में  आगे चले गए और मैं  छुटती गई तुम्हारे पास से  थोड़ी-थोड़ी और एक दिन  मैंने महसूस किया  आज मेरे पास मेरा कहने लायक  मैं भी नहीं बची हूँ तब तक तुम भी आगे के रास्ते से  ओझल होते गए और  मेरा  आगे का रास्ता  बहुत बड़ी खाई में तब्दील हो गया  अब मेरा कहने लायक मेरे पास  चंद सांसें हैं जो मृत्यु की प्रतीक्षा में लीन है

तना हुआ वृक्ष

तुम देख रही हो ना नदी के तट पर नारियल के तने हुए वृक्ष असंख्य वे खड़े रहते हैं नदी के लिए हर अच्छे-बुरे मौसम में होना चाहता हूं मैं भी नारियल का वह वृक्ष खड़ा /झूमता /तना हुआ तुम्हारे लिए जीवन के सभी मौसम में तुम बनो नदी म ैं  बनूं नारियल का वृक्ष झूमता हुआ / तना  हुआ २३/०१/२०१७

प्रहर

मेरा एकांत  कमरे में छाये सन्नाटे का हिसाब  जब लगाता हैं  तब इतिहास अपने पन्नें खोलकर  मेरे समक्ष आ बैठता हैं  पर मेरी जिद्द होती हैं  वर्तमान के लोहे सम  कवच से मैं ढक दूं उसके पन्नें और घास पर बैठी ओस की बूँदे भर लाऊँ अपनी अँजुरी में , सींच दूँ फिर से  एक और नींव भविष्य की  तभी उस कमरे के  सन्नाटे को चीर जाती हैं  दीवार पर लगी घड़ी   संकेत देती हैं  प्रहर के गुजर जाने का।

रिश्ते

अपना खाली समय गुजारने के लिए कभी रिश्तें नही बनाने चाहिए |क्योंकि हर रिश्तें में दो लोग होते हैं, एक वो जो समय बीताकर निकल जाता है ,और दुसरा उस रिश्ते का ज़हर तांउम्र पीता रहता है | हम रिश्तें को केवल किसी खाने के पेकट की तरह खत्म करने के बाद फेंक देते हैं | या फिर तीन घटें के फिल्म के बाद उसकी टिकट को फेंक दिया जाता है | वैसे ही हम कही बार रिश्तें को डेस्पिन में फेककर आगे निकल जाते हैं पर हममें से कही लोग ऐसे भी होते हैं , आसानी से आगे बड़ जाना रिश्तें को भुलाना मुमकिन नहीं होता है | एक संवेदनशील और ईमानदार व्यक्ति के लिए आसान नहीं होता है  और ऐसे लोगों के हिस्से अक्सर घुटनभरा समय और तकलीफ ही आती है |माना की इस तेज रफ्तार जीवन शैली में युज़ ऐड़ थ्रो का चलन बड़ रहा है और इस, चलन के चलते हमने धरा की गर्भ को तो विषैला बना ही दिया है पर रिश्तों में हम इस चलन को लाकर मनुष्य के ह्रदय में बसे विश्वास , संवेदना, और प्रेम जैसे खुबसूरत भावों को भी नष्ट करके ज़हर भर रहे हैं