हर पिता एक से नहीं होते। सारगर्भित रचना। सादर। ----- जी नमस्ते, आपकी लिखी रचना शुक्रवार १३ फरवरी २०२६ के लिए साझा की गयी है पांच लिंकों का आनंद पर... आप भी सादर आमंत्रित हैं। सादर धन्यवाद।
काली रात की चादर ओढ़े आसमान के मध्य धवल चंद्रमा कुछ ऐसा ही आभास होता है जैसे दु:ख के घेरे में फंसा सुख का एक लम्हां दुख़ क्यों नहीं चला जाता है किसी निर्जन बियाबांन में सन्यासी की तरह दु:ख ठीक वैसे ही है जैसे भरी दोपहर में पाठशाला में जाते समय बिना चप्पल के तलवों में तपती रेत से चटकारें देता कभी कभी सुख के पैरों में अविश्वास के कण लगे देख स्वयं मैं आगे बड़कर दु:ख को गले लगाती हूं और तय करती हूं एक निर्जन बियाबान का सफ़र
इसलिए नहीं कि वह बेकार था इसलिए कि वह सबके राज जानता था सबकी कलंक कथाओं का वह एकमात्र गवाह था किसी के भी मुखोटे से वह वक्त बेवक्त टकरा सकता था इसीलिए वह नकारा गया सभाओं से मंचों से उत्सवों से पर रुको थोड़ा वह व्यक्ति अपनी झोली में कुछ बुन रहा है शायद लोहे के धागे से बिखरे हुए सच को सजाने की कवायद कर रहा है उसे देखो वह समय का सबसे ज़िंदा आदमी है।
जब वह औरत मरी तो रोने वाले ना के बराबर थे जो थे वे बहुत दूर थे खामोशी से श्मशान पर आग जली और रात की नीरवता में अंधियारे से बतयाती बुझ गई कमरे में झांकने से मिल गई थी कुछ सुखी कलियां जो फूल होने से बचाई गई थी जैसे बसंत को रोक रही थी वो कुछ डायरियों के पन्नों पर नदी सूखी गई थी तो कहीं पर यातनाओं का वह पहाड़ था जहां उसके समस्त जीवन के पीडा़वों के वो पत्थर थे जिसे ढोते ढोते उसकी पीठ रक्त उकेर गई थी कुछ पुराने खत जिस पर नमक जम गया था डाकिया अब राह भूल गया था मरने के बाद उस औरत ने बहुत कुछ पीछे छोड़ा था पर उसे देखने के लिए जिन नजरों की आज जरूरत थी उसी ने नजरें फेर ली थी इसीलिए तो उस औरत ने आंखें समय के पहले ही मुद ली थी ।
अच्छी कविता
जवाब देंहटाएंमार्मिक
जवाब देंहटाएंहर पिता एक से नहीं होते।
जवाब देंहटाएंसारगर्भित रचना।
सादर।
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जी नमस्ते,
आपकी लिखी रचना शुक्रवार १३ फरवरी २०२६ के लिए साझा की गयी है
पांच लिंकों का आनंद पर...
आप भी सादर आमंत्रित हैं।
सादर
धन्यवाद।
सुंदर
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