बौना नजर आता है
समाज का हर वो बांशिदा
जो जिम्मेदारियों को
रख नेताओं के कंधे पर
केवल शब्दों के
बाण देता है छोड़
आओ
उठाओं जिम्मेदारी का
चादर
जो गिरा
विकास पर बनकर
कफन
धरा की आत्मा से
उर्जा का रस निकालो
उडेल दो आसमान पे
और लगा दो बांशिदों के
पीठ पर एक पंख
जिसकी उडान
अँधेरे को भेदकर
उजाला कर दे ।
कावेरी