नदी सितंबर 17, 2021 सूरज के अस्त होने से छा जाता हैनदी के देह परएक सन्नाटामन में भर जातीएक उदासीनता उसका अल्हडपनढूंढती रहती हैएक तलहटीजिसकी गहराई मेजा बैठती है वह मौन हो एक नई प्रतीक्षा कीनदी फिर जी उठती हैसूर्योदय के साथह शेयर करें लिंक पाएं Facebook X Pinterest ईमेल दूसरे ऐप शेयर करें लिंक पाएं Facebook X Pinterest ईमेल दूसरे ऐप टिप्पणियाँ Digvijay Agrawal17 सितंबर 2021 को 11:35 pm बजे आपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" रविवार 19 सितम्बर 2021 को साझा की गयी है.... पाँच लिंकों का आनन्द पर आप भी आइएगा....धन्यवाद! जवाब देंहटाएंउत्तरजवाब देंसुशील कुमार जोशी18 सितंबर 2021 को 10:19 pm बजेवाह जवाब देंहटाएंउत्तरजवाब देंशिवम कुमार पाण्डेय3 अक्टूबर 2021 को 8:32 am बजेवाह👌जवाब देंहटाएंउत्तरजवाब देंटिप्पणी जोड़ेंज़्यादा लोड करें... एक टिप्पणी भेजें
आपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" रविवार 19 सितम्बर 2021 को साझा की गयी है....
जवाब देंहटाएंपाँच लिंकों का आनन्द पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!
वाह
जवाब देंहटाएंवाह👌
जवाब देंहटाएं