समंदर ने पानी उधार लिया है
नदियों से
जैसे उधार लेते हैं
कुछ एक पिता बेटियों से
उनकी संपत्ति
और अधिकार के साथ चलाते हैं
पितृसत्ता का साम्राज्य
नदियाँ विलुप्त हो रही हैं
समंदर को भविष्य की बंजरता का
आभास फिर भी नहीं हो रहा है
नदियों से
जैसे उधार लेते हैं
कुछ एक पिता बेटियों से
उनकी संपत्ति
और अधिकार के साथ चलाते हैं
पितृसत्ता का साम्राज्य
नदियाँ विलुप्त हो रही हैं
समंदर को भविष्य की बंजरता का
आभास फिर भी नहीं हो रहा है
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