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सुनो ना

सुनो ना

सुनो ना
तुम्ह बनो कवि
मै बनूँ तुम्हारी कविता
तुम्हारे मन से
बरस पडूँ छन छन
लफ़्ज़ों की नदियों में
उकेर दो तुम मुझमें
एक प्रेमिका

बन जाये 
एक सिलसिला प्यार का
समा जाऊं तुम्हारे कण कण मे
बाँध दूं तुम्हारी चचंल गति
मर्यादा में
बन जाऊं तुम्हारी सीता
तुम बनो मेरे राम

उस कविता मे भर दो तुम
कुछ रंग गुलाबी
मै बह जाऊं उसमें
निर्झर बनके सरिता
जीवन की अँधयारे गलियों मे
जला दो एक दिया प्रेम का

थमा दो मेरे हाथ में
एक टोकरी सुख की
जिसमें कुछ रंग हो
सजा दूं मै एक चित्र
अगले जनम का
जिसमें तुम रूक जाना
अगले कई जन्मों तक

भरूँ मैं अपने पंखो में उडान
आऊं मै तेरे धाम 
बाँध लू तुम्हे
मै अपने केशों में
जैसे बँधा होता है
निर्मल जल मेघ में

निहारता है चाँद तुलसी को
निरतंर
तुम बनो चाँद
मै बनूँ तुम्हारी तुलसी
उत्सव नही है ये
एक दिन का
युगों युगों का साथ है
चाँद तुलसी का

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रिश्ते

अपना खाली समय गुजारने के लिए कभी रिश्तें नही बनाने चाहिए |क्योंकि हर रिश्तें में दो लोग होते हैं, एक वो जो समय बीताकर निकल जाता है , और दुसरा उस रिश्ते का ज़हर तांउम्र पीता रहता है | हम रिश्तें को  किसी खाने के पेकट की तरह खत्म करने के बाद फेंक देते हैं | या फिर तीन घटें के फिल्म के बाद उसकी टिकट को फेंक दिया जाता है | वैसे ही हम कही बार रिश्तें को डेस्पिन में फेककर आगे निकल जाते हैं पर हममें से कही लोग ऐसे भी होते हैं , जिनके लिए आसानी से आगे बड़ जाना रिश्तों को भुलाना मुमकिन नहीं होता है | ऐसे लोगों के हिस्से अक्सर घुटन भरा समय और तकलीफ ही आती है | माना की इस तेज रफ्तार जीवन की शैली में युज़ ऐड़ थ्रो का चलन बड़ रहा है और इस, चलन के चलते हमने धरा की गर्भ को तो विषैला बना ही दिया है पर रिश्तों में हम इस चलन को लाकर मनुष्य के ह्रदय में बसे विश्वास , संवेदना, और प्रेम जैसे खुबसूरत भावों को भी नष्ट करके ज़हर भर रहे हैं  

दु:ख

काली रात की चादर ओढ़े  आसमान के मध्य  धवल चंद्रमा  कुछ ऐसा ही आभास होता है  जैसे दु:ख के घेरे में फंसा  सुख का एक लम्हां  दुख़ क्यों नहीं चला जाता है  किसी निर्जन बियाबांन में  सन्यासी की तरह  दु:ख ठीक वैसे ही है जैसे  भरी दोपहर में पाठशाला में जाते समय  बिना चप्पल के तलवों में तपती रेत से चटकारें देता   कभी कभी सुख के पैरों में  अविश्वास के कण  लगे देख स्वयं मैं आगे बड़कर  दु:ख को गले लगाती हूं  और तय करती हूं एक  निर्जन बियाबान का सफ़र

क्षणिकाएँ

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