*गुलाब* की पंखुड़ियों पर
गिरी ओंस की बूंदें
प्रमाण होती हैं
किसानों के खेतों में गिरे पसीनों की
उसने मिट्टी में सहेजें होते हैं
रोटी, कपड़े और मकान के
कुछ चमकिले रंग
फूलों के मुरझाने से
उदास होती हैं स्त्री
खोल देती हैं वो स्मृतियों की गांठें
और बह जाता है नमक का दरिया
कुछ इसी तरह अपनी
फ़सल की बरबादी पर
बच्चों के अंतड़ियों में पड़ी भूख
लाल रक्त बन निकलता है आंखों से
गुलाब का खिलना
केवल प्रेम को बचाने भर नहीं है
बल्कि हर पंखुड़ियों के नीचे
तह कर रखीं होती हैं
ईश्वर ने एक जरूरत किसान की